स्वदेशी और असहयोग

आज विदेशी कम्पनी की लूट बंद करने का सबसे कारगर उपाय स्वदेशी और असहयोग है |

विश्व की 5 महाशक्ति जापान अमेरिका फ्रांस रुस चीन ने विदेशी गुलामी से निजात पाने और अपने देश को शक्तिशाली बनाने में मात्र इस कारण से सफल रहे कि उनके देश के लोगो ने प्रण किया कि वह जो भी वस्तु प्रयोग करेंगे |

स्वदेशी वस्तु का प्रयोग करने से सबसे बडा लाभ यह है कि जो बडी बडी विदेशी कंपनी लुट रही है उनकी आर्थिक मदद कम होते होते बंद हो जाती है जिस कारण से उनका उस देश में व्यापार चलाने में कोई लाभ नही रहता जिस कारण से वह अपना कारोबार समेट लेती है और लुट बंद हो जाती है | विदेशी कंपनी तब तक ही टिकी रहती है जब तक उन्हें लाभ प्राप्त होता रहे |

विश्व कि महाशक्ति जापान मे भी यह स्वदेशी आंदोलन चला | 250 वर्ष पहले जापान भी राजा की गलतियों के कारण 5-6 देशों की गुलामी के दुष्च्रक में फँस गया तब 1858 में मैजी के नेत्रत्व में आंदोलन चला तब विदेशी फौजो ने उनका आंदोलन सैनिक युद्ध में दबा दिया तब उन्होने "स्वदेशी वस्तुओ" का प्रयोग का आंदोलन शुरु किया और जापान स्वत्रंत हो गया |

आज भी जापानी दूध की चाय नही पीते क्योंकि उनके यहाँ दूध का उत्पादन कम है और स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के कारण से दूध दूसरे देश से नही मंगाते | उनकी स्पष्ट मान्यता है कि जो उनके देश में उपलब्ध है उसका ही प्रयोग करेंगे |

1858 में मैजी द्वारा क्रांति शुरुआत करने के बाद 2009 तक जापान ने बहुत तरक्की की क्योंकि उन्होने तकनीकी सीखी परन्तु स्वंय की स्वदेशी भाषा जापानी में सीखी| जापान में बचपन से पढाया जाता है कि जापानी होना क्या है ? स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग से क्या लाभ है |

अमेरिका भी अग्रेजों का गुलाम था| जार्ज वॉशिंगटन के नेत्रत्व में 1776 में आज़ादी का आंदोलन शुरु हुआ जिसमे अँग्रेज़ी वस्तुओ का सम्पूर्ण बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओ का प्रयोग का संकल्प बडी बडी सभाओं में किया जाने लगा| लोगो में सिर्फ स्वदेशी वस्तुओ के प्रयोग की भावना कूट कूट के भर गई कि बहुत ठंड पढने पर भी गर्म अमेरिकी कपडा नहीं मिला तो उन्होने नहीं पहना और हजारों व्यक्ति ठंड से ठिठुर कर मर गये पर अंग्रेजी वस्र्त नहीं पहना| अमेरिका स्वदेशी की भावना से ही स्वत्रंत हुआ और सर्वोच्य शक्ति बना है |