भाई राजीव दीक्षित लेख व किताबें

भाई राजीव दीक्षित ने विभिन्न विषयो पर अनेकों लेख व किताबें लिखी है । राजीव भाई के द्वारा लिखित अथवा संपादित आर्टिकल्स की सूची यहाँ दी जा रही है| अतिशीघ्र ये आर्टिकल्स इस वैबसाइट पर उपलब्ध कराये जा रहे है|



---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

आर्टिकल्स की सूची

  • अब भारतीय समुद्र भी विदेशी कंपनियों के कब्जे में - 2 पेज
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियों का काला इतिहास - 3 पेज
  • विदेशी बिजली परियोजना की अनुमति: लूट का सरकारी लाइसेंस - 2 पेज
  • हिंदुस्तान लिवर के कारनामे - 4 पेज
  • यदि टिहरी बांध बन गया तो - 2 पेज
  • एशियाई देशों की आर्थिक बरबादी: भारत के लिए सबक - 3 पेज
  • भारत में अमरीकी साम्राज्यवाद की दस्तक - 3 पेज
  • W.T.O.(G.A.T.T.) की नयी पेटेंट व्यवस्था: स्वदेशी दवा उधोग के लिए खतरा - 3 पेज
  • डंकल प्रस्ताव: आयात की बाध्यता - 2 पेज
  • गोरी चमड़ी वालों एक दिन तुम अपनी ही ज़िंदगी में घुट कर मर जाओगे - 2 पेज
  • पेप्सी कोला: पानी के बहाने गुलामी - 30 पेज
  • स्वदेशी भारत तो आम आदमी से बनेगा - 4 पेज
  • बहादुर नाविक नहीं, लुटेरा था वास्कोडिगामा - 3 पेज
  • कौन से हिंदुस्तान में हम रहते है - 3 पेज
  • पार्टियों के बारे में नहीं, देश के बारे में सोचिए - 3 पेज
  • स्वदेशी के डाइनामाइट से आज की गुलामी का पहाड़ तोड़ना होगा - 3 पेज
  • यह ग्लोबलाईजेशन नहीं, री-कोलोनाइजेशन है - 3 पेज
  • गुरुकुलों के आधार पर टिकी थी हमारी संस्कृति - 3 पेज
  • इंडियन इंडिपेंडेन्स एक्ट के तहत मिली है आज़ादी - 3 पेज
  • झूठे विज्ञापनों से ललचाते है हमारे मन को - 3 पेज
  • कानून बना कर लूटा हिंदुस्तान को - 3 पेज
  • भारत को लूटने के लिए गुलाम बनाया - 3 पेज
  • W.T.O. गुलामी का संविधान - 4 पेज
  • स्वदेशी तकनीक से बनेगा असली भारत - 4 पेज
  • नए पेटेंट क़ानूनों से भारतीय दवा उधोग खतरे में - 3 पेज
  • अँग्रेज़ो ने दी गौहत्या को कानूनी मान्यता - 4 पेज
  • आर्थिक प्रतिबंधों का उपाय: विदेशी सामानों का बहिष्कार - 4 पेज
  • दुनिया की आर्थिक मंदी का हल है स्वदेशी - 3 पेज
  • कृषि और उधोग प्रधान भारत को अँग्रेज़ो ने गरीब बनाया - 4 पेज
  • भारतीय कृषि की समस्याएँ और उनका समाधान - 3 पेज
  • हमारे देश की प्रतिभाएं विदेशों को समृद्ध कर रही है - 3 पेज
  • तिलक का स्वदेशी आंदोलन - 4 पेज
  • पुनः समझना होगा गांधीजी को - 3 पेज
  • छोटी और कारगर तकनीकों से बनेगा स्वदेशी मॉडल - 4 पेज

-----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

पुस्तकें और साहित्य की सूची

  • 1. स्वदेशी चिकित्सा (महान आयुर्वेद विशेषज्ञ : श्री वाग्भट्ट द्वारा रचित अष्टांगहृदयम
    पर आधारित भाग – १,२,३ संकलन एवं संपादन – राजीव दीक्षित)। -१२० रु.
  • 2. स्वदेशी चिकित्सा (आपका स्वास्थ्य आपके हाथ) – २५ रु
  • 3. स्वदेशी चिकित्सा (स्वावलम्बी और अहिंसक उपचार) – २५ रु
  • 4. स्वदेशी चिकित्सा (गंभीर रोगो की घरेलू चिकित्सा) – २५ रु
  • 5. बहुराष्ट्रीय कंपनियो का मकड़जाल – २५ रु.
  • 6. बहुराष्ट्रीय कंपनियों की असलियत – २५ रु
  • 7. अंग्रेज़ो भारत वापिस आओ – २५ रु
  • 8. विदेशी कंपनियो की जंजीरों में जकड़ा दैनिक जीवन (स्वदेशी – विदेशी सामानों की सूची) – १० रु.
  • 9. गिद्धम शरणम गच्छामि (आंदोलन के लिए कविता और गीत संग्रह) – २५ रु
  • 10. दवाक्षेत्र और स्वदेशाभिमान (स्वदेशी विदेशी दवाइयो पर आधारित) – २० रु
  • 11. आजादी बनाम गुलामी – एक विमर्श – २५ रु
  • 12. सारी दुनियाँ का बोझ हम उठाते है -१० रु.
  • 13. सच्चे स्वराज्य की रूपरेखा – २० रु
  • 14. गरीबी बढ़ाने का षड़यंत्र (बजट का मायाजाल)– २० रु.
  • 15. पेप्सी कोला – सपनों के सौदागर – २५ रु
  • 16. स्वावलंबी खेती कैसे करे – २० रु.
  • 17. आज भी खरे है तालाब – २५ रु.
  • 18. JPC and CSE Report on Hazardous Soft Drinks and Water – ५० रु.
  • 19. स्वदेशी और भारतीयता (धर्मपालजी) – २० रु.
  • 20. अंग्रेज़ो से पहले का भारत (धर्मपालजी) – १० रु.
  • 21. भारत का स्वधर्म (धर्मपालजी) – २५ रु.
  • 22. भारतीय चित्त मानस और काल (धर्मपालजी) – १० रु.
  • 23. मेरे सपनो का भारत (महात्मा गांधी) – ३० रु.
  • 24. दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास (महात्मा गांधी) – २० रु.
  • 25. ग्राम स्वराज्य (महात्मा गांधी) – ३५ रु.
  • 26. हिंद स्वराज (महात्मा गांधी) – १० रु.
  • 27. बहुराष्ट्रीय विश्व व्यवस्था में भारत – २० रु.

इन पुस्तकों को पाने के लिए संपर्क करें :-

प्रदीप दीक्षित (राजीव जी के छोटे भाई)
10, जोतवानी लेआउट, सेवाग्राम रोड, सेवाग्राम, वर्धा, महाराष्ट्र (442102)
फ़ोन - 0982 252 0113, 0715 226 0041
ईमेल (Email): PradeepDixitABA at rediffmail.com

------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

भोपाल गैस हत्याकांड भारत के लिए एक सबक (भाग १)

भारत देश में चल रही अंग्रेजियत वाली न्याय व्यवस्था का ही दुष्परिणाम है – भोपाल गैस हत्याकांड और उस पर आया जिला अदालत का फैसला | 25 साल और 6 माह तक चली अदालती कार्यवाही, 135 से अधिक प्रस्तुत हुए गवाह, 7 से अधिक बदले गए न्यायाधीश, 3000 से अधिक पन्नों पर लिखा गया फैसला | फैसला क्या है ? भोपाल में यूनियन कार्बाइड नाम की अमरीकी कंपनी के कारखाने में 3 दिसंबर 1984 की रात को जहरीली मिथाइल आइसो साइनेट गैस के रिसाव के कारण एक ही रात में लगभग 17000 लोग मर गए थे | और अभी तक 35000 मर चुके हैं | 5 लाख से अधिक जीवित लोगों पर इस जहरीली गैस मिथाइल आइसो साईंनाइड का दुष्प्रभाव पड़ा है | जो मर गए वो तो मुक्त हो गए | लेकिन जो जीवित रह गए हैं उनका हाल मरे हुओं से बदतर है | इस हत्याकांड के बाद पैदा हुए बच्चों पर जेनेटिक दुष्प्रभाव भी गहरा पड़ा है | सारी दुनिया के औद्योगिक इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी त्रासदी मानी गयी है ये दुर्घटना | 1986 में इस दुर्घटना के बारे में अदालती कार्यवाही शुरू हुयी और 26 साल बाद अभी 6 जून 2010 को फैसला आया है | इस फैसले में अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड को छोड़ दिया गया है | इस अमरीकी कंपनी के भारतीय साझेदार केशव महिन्द्रा और उनके सहयोगियों को 2 साल की जेल, जिसमे कभी भी जमानत हो सकती है, दी गयी है | अदालत का फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद केशव महिन्द्रा और उनके सहयोगियों को जमानत पर छोड़ दिया गया | इस पूरे हत्याकांड के लिए जिम्मेदार प्रमुख अभियुक्त वारेन एंडरसन को अदालत, भारत की पुलिस और सरकार कभी भी गिरफ्तार नहीं कर सकी | एक बार वारेन एंडरसन को पकड़ा भी गया था लेकिन अमरीका के दबाव में तत्कालीन केन्द्र व राज्य सरकारों के आदेश पर उसे भारत से भगा दिया गया | भोपाल के गैस पीड़ित पिछले 25 सालों से जिस न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे, वह भी उन्हें नहीं मिला | ऐसा साफ दिखाई दे रहा है की न्याय के नाम पर गत 25 सालों से भोपाल के गैस पीड़ित नागरिकों के साथ खिलवाड़ किया गया है | इस पूरे मामले में ऐसा साफ़ दिखाई दे रहा है कि भारत सरकार ने विदेशी कंपनियों और अमरीकी दबाव के सामने शर्मनाक आत्मसमर्पण कर दिया है | भारत में सभी राजनैतिक दलों की सरकारों द्वारा अकारण ही विदेशी कंपनियों को सभी तरह की सुविधाओं के साथ बुलावा दिया जाता है | इसके लिए वैश्वीकरण और उदारीकरण की नीतियों का सहारा लिया जाता है | इसमें सबसे बड़ा तर्क विदेशी कंपनियों के समर्थन में ये होता है की जब विदेशी कंपनियां आती है तो आधुनिकतम तकनीकी और उच्चतम तकनीकी लेकर आती हैं | यूनियन कार्बाइड भी अमरीका से आधुनिकतम और उच्चतम तकनीक लेकर आई थी और कारखाना लगाया था | उसी अमरीकी उच्च और आधुनिक तकनीक वाले कारखाने में 3 दिसंबर 1984 को टैंकर में से जहरीली गैस मिथाइल आइसो साइनेट का रिसाव हुआ , जिसके कारण यह दुर्घटना हुयी थी | यदि तकनीक जो अमरीका से आई वह उच्चतम और आधुनिक थी, तो जहरीली गैस का रिसाव कैसे हो गया ? यदि तकनीक उच्चतम और आधुनिक थी तो घंटों तक होते रहे गैस के रिसाव को रोक क्यों नहीं पाए ? क्या यूनियन कार्बाइड के अधिकारीयों को इस जहरीली गैस का मनुष्य शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में कोई ज्ञान नहीं था ? और यदि था तो उसके बचाव का कोई रास्ता उनके पास क्यों नहीं था ? अमरीका और यूरोप में जिन जहरीले कीटनाशकों और जंतुनाशकों को बनाना और बेचना बंद है , उन्ही को भारत में बनाने और बेचने के लिए यूनियन कार्बाइड भारत में क्यों आई ? क्या जब उसको लाइसेंस दिया गया तब मिथाइल आइसो साइनेट जैसी जहरीली गैस के दुष्प्रभावों के बारे में सरकार को मालूम नहीं था या घूस खा कर लाइसेंस दिया गया ?   अधिक जाने…