परिवर्तन

परिवर्तन जब होता है तो शुरु मे किसी को भरोसा नहीं होता है लेकिन बाद मे हो जाता है

विश्व के 70 से अधिक देशो में परिवर्तन हुआ पर परिवर्तन के आंदोलन की शुरुआत तब हुई जब भ्रष्टाचार चरम बिन्दु पर था, विदेशी लूट चरम बिन्दु पर थी, परन्तु जब आन्दोलन की शुरुआत हुई तो किसी को विश्वास नही हुआ, परन्तु सभी देशो ने अपने आंदोलनो से सफ़लता प्राप्त की| स्वयं अपना भारत देश भी इसका उदाहरण है कि अंतत: अँग्रेजो कि गुलामी से आजाद हुआ किसे भरोसा था कि अँग्रेज जिनका सूरज कभी अस्त नहीं होता उससे भारत देश आजाद होगा पर हो गया |

जापान मे 1858 में मैजी के नेत्रत्व में 5-6 देशो की गुलामी से बाहर निकलने का आंदोलन शुरु हुआ तो उन देशो कि सेना ने हमला कर मैजी व साथियो को दबोचना शुरु किया परन्तु सैनिक युद्ध में हारने के बाद मात्र स्वदेशी वस्तुओ का प्रयोग करने के संकल्प से जापान आज आर्थिक महाशक्ति के रुप में उभरा है | यह कोई कैसे विश्वास कर सकता है कि 1945 मे हिरोशिमा व नागासाकी शहर परमाणु बम नष्ट होने के बाद भी आर्थिक रुप से महाशक्ति हो गया| इस पर्रिवर्तन पर शुरु में किसी को विश्वास नही था पर हो गया|

अमेरिका के 11 करोड़ मूल रेड इंडियन नागरिक को स्पेनिश व अग्रेजो ने हमला कर करके मार डाला तथा 1765 में गुलामी के दौरान अमेरिकी नागरिकों पर टैक्स बहुत बढा दिया गया जिस कारण अमेरिकी मुल नागरिक बहुत गरीब हो गये| 1776 आते आते जार्ज वॉशिंगटन के नेत्रत्व मे आजादी आंदोलन शुरु हुआ| शुरु में किसी को विश्वास नही था अमेरिका स्वतंत्र होगा पर हो गया | रुस के राजा निकोलस जार के प्रथम विश्व युद्द 1914 में हारने के बाद काफी आर्थिक हानि हुई जिस कारण रुबल की अनाधुन छपाई हुई जिससे मुद्रा स्फीति बढ ग़ई ,लोग गरीब हो गए | 1916 मे लेलिन के नेत्रत्व में आंदोलन शुरु किया जार को गद्दी से उतार कर फांसी दे दिया| शुरु में किसी को विश्वास नही था कि ‘जार’ के शासन का अंत हो जायेगा पर 2 हो गया |

चीन मे अँग्रेज सैनिक युद्द में सफ़ल नही होने पर ‘अफीम’ खिला खिला कर नशे का गुलाम बनाकर कब्जा किया| परन्तु जब कम्युनिस्ठो के द्वारा व्यसन मुक्ती आंदोलन,स्वदेशी आंदोलन शुरु किया तब किसी को विश्वास नहीं था चीन सफल होगा क्योंकि संपूर्ण युवा नशे में गुलाम था पर हो गया और चीन आज महाशक्ति के रुप मे उभरा हैं |

फ़्रांस में भी लुई-16 के गलत नीति के विरोध में आंदोलन शुरु हुआ और सफल हुआ जिस पर पहले किसी ने विश्वास नही किया पर हुआ|

और अंतिम में पुर्वी जर्मनी और पश्चिम जर्मनी एक दूसरे के कट्टर विरोधी , फुटी आँख से भी एक दूसरे को सुहाते नही थे| किसे पता था या किसे विश्वास था कि दोनो एक हो जाएँगे और दिवार ढ़ह जायेगी| पर हो गया जर्मनी एकीकरण इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि किसी परिवर्तन मे किसी को विश्वास नहीं होता पर वो होता है |



इस विषय पर दिया गया व्याख्यान